मिलन

वो रात सी हसीन थी

मै दिन सा गंभीर

वो सावन की फुहार थी

मै बाढ़ का काल

वो शीत की धूप थी

मै ग्रीष्म का कहर

कैसे होता मिलन हमारा

वो दिया की बाती थी

मै उसका अंधकार


        Rahul-

Comments

Post a Comment

Popular Posts