जीने का मजा ही अलग है
खुशियों की बहारों में
सावन की फुहारों में
घर के आंगन की उस मदमस्त फिजाओं में,
जीने का मजा ही अलग है।
मां के आंचल में ,
परिवार के साथ में,
दोस्तो के साथ में,
जीने का मजा ही अलग है।
गांव की गलियों में,
हरी भरी बागियों में,
बादलों की अठखेलिययों में,
जीने का मजा ही अलग है।
दोस्तो की मस्तियों में,
अपनों की संगतियों में,
लहरों की कस्तियओं में,
जीने का मजा ही अलग है।
फूलों की खुशबू में,
पेड़ों की छाओं में,
ठंडी हवाओं के झोकों में,
जीने का मजा ही अलग है।
बारिश की फुहारों में,
ओंस की बूंदों में,
और….. परिवार की यादों में,
जीने का मजा ही अलग है…


Comments
Post a Comment