बचपन के दिन

मुझे याद है वो बचपन के दिन

कंचे जेब में खनखनाते थे

और गिल्ली डंडे से धूम मचाते थे

लुका छिपी में घर सर पर उठाते थे

और बर्फ पानी में धीरे धीरे खिसक जाते थे

पत्थरों को गेंद से गिराते थे

और फिर जल्दी संवारते थे

छुट्टियों में धूम मचाते थे

और गर्मियों के इंतजार में ही स्कूल जाते थे

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