भिखारी
भिखारी …
मै बारहवीं में था तब की बात है लगभग 7 साल पहले ।
किशोरवस्था थी मन चंचल था दोस्तो की टोली के साथ सड़क पर मस्ती करते हसंते गाते चल रहे थे । कि रास्ते में एक बूढ़े बाबा मिले जो भूखे होने की बात कर के रुपया मांग रहे थे।
पहले तो हमने उन्हें ना ना कह के माना कर दिया पर वो माने नहीं हाथ पैर जोड़ के पैसे मांगने लगे तो हमसे देखा नहीं गया।
हमने 1–2 रुपए जिसके पास जो भी था से दिया और मस्त सिना चौड़ा कर के गर्व से सर उठाते हुए चलने लगे पर हमें ऐसे करते देख वो बाबा वो जाते जाते बोले कि आज कल के बच्चे हो या जवान सब सर उठा के आसमां देखते हुए चलते हैं पर उन्हें कौन समझाए कि ठोकर आसमां से नहीं जमीन से लगती है।
वाकई उन्होंने बहुत बड़ी बात कही थी पर उस समय हमे ये समझ नहीं आया पर आज लगता है उनकी बातो में दम था।
-राहुल

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