वो शायद बिछडने का लम्हा था

 उसकी ख़ामोशियों ने मुझ पर एक गहरा असर छोड़ा था

वो शायद बिछड़ने का लम्हा था

मैं खुद को तैयार ही कर रहा था

पर वो मेरी तैयारियों सी भी अलग था

वो शायद बिछड़ने का लम्हा था।


मै सोचता था एक प्यारी मुस्कान छोड़ जाएगी

गले मिल दूर जाने से हुए दर्द को बयां करेगी

पर जो हुआ वो बिल्कुल अलग था।


उसकी खामोशी कुछ अलग कहानी कहती थी

दूर होने के लिए वो शायद बहुत पहले से सोचती थी

मौके की तलाश ना जाने कबसे रहती थी।


सच कहती थी कि मै उसे समझ नहीं पाया

उसकी मुस्कान की कहानी को पढ़ नहीं पाया

उसकी मुस्कान के पीछे कोई और था

और मै उसे खुद का अभिमान समझ बैठा।


अब वो जा चुकी थी

लंबे अरसे बाद दिखीं थी

उसका मुस्कुराता चेहरा देख मै खुश हुआ

पर क्ष्ण भर में भ्रम टूट गया

उस मुस्कान की वजह उसके बगल में था

और मै पागल सा बाहे फैला

आंखे बंद कर इंतजार कर रहा था।

राहुल "गुमनाम शख्स"

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