मेरी ज़िन्दगी

 सोचता हूं लिखूं 

अपनी ज़िन्दगी के कुछ हसीन पलों को

पर भूत के पलों की हसीं

वर्तमान में छिप जाती है

रह जाती है

मुश्किलें, समस्याएं और परेशानियां

लिख लिख कर मिटा देता हूं

शायद शब्दों की गहराईया भी नाप नहीं पाती

उन तमाम वेदानओं को 


   राहुल ' गुमनाम शख्स '



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