नज़र
काश बातें होती नजर की
कहती कुछ, छिपाती कुछ
पर इजहार ए मोहब्बत तो
ना चाहते हुए भी करती।
उसकी नजरें कुछ झुकी थी,
लगता मानो शीतम ढा रही थी,
काश एक बार देख लेती वो,
ये सोच कर ही आंखे रुकी हुई थी।
उसकी आंखो में नमकिनियत थी,
तो हममें ठरकपन थी,
सोचा इसी ठरकपन में जा के बोल दूं उसे,
पर मेरे पहुंचने से पहले ही ,
वो किसी और कि हो चुकी थी।
अब समझ आया वो आंखो का इशारा,
वो झुकी हुई पलको में हौले से शर्माना,
उसका इश्क तो हमारे पीछे बैठा था,
और खाम खां ही हम उसे अपना समझ बैठे।
राहुल "गुमनाम शख़्स"


Badhiyan.. Kiske liye hai🤔🤔🤔🤔
ReplyDeleteसभी पात्र काल्पनिक हैं
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